मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र ने दी पुलिस को बड़ी सौगात, शहीद कोष में 75 लाख तो दारोगा और इंस्पेक्टरों को मिलेगा वर्दी भत्ता

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने शहीद स्मारक पर पुलिस एवं अर्द्ध सैन्य बलों के शहीदों को दी श्रद्धांजलि

-एएसआई और इंस्पेक्टर के वर्दी भत्ते में 1000 रुपये की वृद्धि की घोषणा

वैली समाचार, देहरादून।

 मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने पुलिस लाइन देहरादून में शहीदों को पुष्प चक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इस मौके पर शहीदों के परिजनों को शॉल ओढ़कर सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने पुलिस शहीद कोष में 75 लाख देने तथा एएसआई से इंस्पेक्टर तक को एक एक हजार वर्दी भत्ता इजाफा करने की घोषणा की है। इस दौरान कोरोना काल में पुलिस के द्वारा किए गए अच्छे कार्य की सराहना की गई।

पुलिस लाइन में आयोजित पुलिस स्मृति परेड में मुख्यमंत्री ने शिरकत कर शहीद स्मारक पर पुलिस एवं अर्द्ध सैन्य बलों के शहीदों को पुष्प चक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। साथ ही उत्तराखंड के शहीद पुलिस व अर्द्धसैन्य बलों के परिजनों को सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि देश की आंतरिक सुरक्षा व कानून व्यवस्था बनाए रखने का उत्तरदायित्व राज्यों की पुलिस बल व अर्द्धसैनिक बलों का है। अपने इस उत्तरदायित्व को निभाते हुए पुलिस कर्मियों अपने जीवन की आहुति को भी तत्पर रहते हैं। विगत एक वर्ष में भारतवर्ष में 265 अर्द्धसैनिक बलों एवं पुलिस कर्मी शहीद हुए हैं, जिसमें उत्तराखंड पुलिस के 6 वीर शहीद हुए हैं। ड्यूटी के दौरान प्राणों की आहुति देने वाले ये पुलिस कर्मी हम सब के लिए प्रेरणा के स्रोत है। सम्पूर्ण भारतवासी अपने शहीद पुलिस कर्मियों व अर्द्ध सैनिक बलों को हार्दिक श्रद्धांजलि देते हुए नतमस्तक हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के दिन हम इन पुलिस कर्मियों के परिजनों के प्रति भी अपनी हार्दिक संवेदनाएं प्रकट करते हैं। आज पूरा विश्व आतंकवाद और कोविड-19 महामारी से जूझ रहा है। हमें इन चुनौतियों का डटकर सामना करना है। इनसे निपटने के लिए एक सुनियोजित रणनीति के तहत कार्रवाई किए जाने की आवश्यकता है।इस मौके पर विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल, कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल, मेयर देहरादून सुनील उनियाल गामा, विधायक हरवंश कपूर, मुना सिंह, उमेश शर्मा काऊ, विनोद चमोली, गणेश जोशी, एसीएस राधा रतूड़ी, डीजी लॉ एंड आर्डर अशोक कुमार ने भी शहीद स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित कर शहीदों को श्रद्धांजलि दी।

पुलिस महानिदेशक बोले

पुलिस महानिदेशक अनिल कुमार रतूड़ी ने कहा कि 21 अक्टूबर 1959 को भारत की उत्तरी सीमा पर लद्दाख के 15 हजार फीट ऊॅंचे बर्फीले दुर्गम क्षेत्र में केन्द्रीय रिजर्व पुलिस की एक गश्ती टुकड़ी के 10 बहादुर जवानों ने चीनी अतिक्रमणकारियों से लोहा लिया। अत्यन्त बहादुरी से लड़ते हुए अपनी मातृभूमि की रक्षा में अपने प्राणो की आहुति दी थी। इन्ही वीर सपूतों के बलिदान की स्मृति में प्रत्येक वर्ष आज के दिन ‘‘पुलिस स्मृति दिवस‘‘ मनाया जाता है।

 

देश की रक्षा में इन्होंने दिया बलिदान

पिछले एक साल में देशभर में 265 पुलिस कर्मियों ने देश रक्षा में अपनी आहुतियां दी है। राज्यवार पुलिस कर्मियों की संख्या कुछ इस प्रकार है। आन्ध्र प्रदेश 3,अरूणाचल प्रदेश 2,बिहार 9,छत्तीसगढ़ 25, हरियाणा 2, झारखण्ड 8, कर्नाटक 17,मध्यप्रदेश 7, महाराष्ट्र 5, मणिपुर 2, उड़ीसा 1, पंजाब 2, राजस्थान 2, तमिलनाडू 3, त्रिपुरा 2, उत्तर प्रदेश 9, उत्तराखण्ड़ 6, पश्चिम बंगाल 11, अण्डमान और निकोबार द्वीप 2,दिल्ली 11
जम्मू एण्ड कश्मीर 12, असम राईफल 3, बीएसएफ 25, सीआईएसएफ 7, सीआरपीएफ 29, एफएस,सीडी एण्ड एचजी 4, आईटीबीपी 18, एमएचए 9, आरपीएफ 14, एसएसबी 15

 

उत्तराखंड में ये हुए शहीद

उत्तराखण्ड पुलिस में इस साल 06 अधिकारियों, कर्मचारियों ने ड्यूटी के दौरान अपने प्राणों की आहुति दी है। इनमें एसआई माया बिष्ट जनपद नैनीताल, एसआई नरेश पाल सिंह जनपद नैनीताल, सिपाही ललित मोहन जनपद नैनीताल, संजय कुमार जनपद देहरादून, कैलाश लाल जनपद ऊधमसिंहनगर, चालक नन्दन सिंह जनपद नैनीताल ने डयूटी के दौरान बहादुरी के साथ अपनी जान दी है।

 

पुलिस को इनका मिलेगा लाभ

पुलिस की इन्ही जोखिमपूर्ण कार्य-परिस्थितियों के दृष्टिगत आपके नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा पुलिस कर्मियों एवं उनके परिवारों के हितार्थ समय-समय पर कई कल्याणकारी योजनाएं चला रही है। इन्ही में चिकित्सा प्रतिपूर्ति, व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा योजना, जीवन रक्षक निधि तथा मेधावी बच्चों को छात्रवृत्ति आदि स्वीकृत की गयी है। इन योजनाओं से उत्तराखण्ड पुलिस कर्मी एंव उनके पारिवारिक-जन लाभान्वित होते रहते हैं।
इस वर्ष गृह मंत्रालय, भारत सरकार के निर्देशानुसार पुलिस स्मृति दिवस के साथ-साथ पुलिस झण्डा दिवस (Police Flag Day) भी मनाया जा रहा है। पुलिस अधिकारियों/कर्मचारियों में झण्डे वितरित किये जायेंगे और वितरण के पश्चात स्वैच्छिक दानदाताओं से प्राप्त धनराशि भारत सरकार द्वारा संचालित National Police Memorial Society (NPMS) को भेजी जायेगी। परिषद द्वारा यह धनराशि पुलिस एवं अद्र्वसैनिक बलों के शहीद अधिकारी/कर्मचारी के परिवार के कल्याण में प्रयोग की जायेगी।

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